Monday, 2 February 2015

दमा, श्वास रोग

1.खांसी : बच्चों की खांसी में अगर और ईश्वर मूल (ईश्वर की जड़) को पीसकर सीने पर लेप करने से आराम होता है।
 
2.`दमा, श्वास रोग`` : अगर का इत्र 1 से 2 बूंद पान में डालकर खिलाने से तमक श्वास से छुटकारा मिल जाता है।

दमा (श्वास) होने पर

1.पेट के रोग : छोटी पीपल और अकरकरा की जड़ का चूर्ण बराबर की मात्रा में पीसकर आधा चम्मच शहद के साथ सुबह-शाम, भोजन के बाद सेवन करते रहने से पेट सम्बंधी अनेक रोग दूर हो जाते है।
 
2.दमा (श्वास) होने पर : अकरकरा के कपड़छन चूर्ण को सूंघने से ‘वास का अवरोध दूर होता है। 

सिर दर्द

सिर दर्द : अपराजिता की फली के 8-10 बूंदों के रस को अथवा जड़ के रस को सुबह खाली पेट एवं सूर्योदय से पूर्व नाक में टपकाने से सिर का दर्द ठीक हो जाता है। इसकी जड़ को कान में बांधने से भी लाभ होता है।
 
आधाशीशी यानी आधे सिर का दर्द (माइग्रेन) : अपराजिता के बीजों के 4-4 बूंद रस को नाक में टपकाने से आधाशीशी का दर्द भी मिट जाता है।

विष

विष पर :
जानवरों के काटने व सांप, बिच्छू, जहरीले कीड़ों के काटे स्थान पर अपामार्ग के पत्तों का ताजा रस लगाने और पत्तों का रस 2 चम्मच की मात्रा में 2 बार पिलाने से विष का असर तुरंत घट जाता है और जलन तथा दर्द में आराम मिलता है। इसके पत्तों की पिसी हुई लुगदी को दंश के स्थान पर पट्टी से बांध देने से सूजन नहीं आती और दर्द दूर हो जाता है। सूजन चढ़ चुकी हो तो शीघ्र ही उतर जाती है

अमर बेल

अमर बेल
 
1.खुजली : अमर बेल को पीसकर बनाए गए लेप को शरीर के खुजली वाले अंगों पर लगाने से आराम मिलता है।
 
2.पेट के कीड़े : अमर बेल और मुनक्कों को समान मात्रा में लेकर पानी में उबालकर काढ़ा तैयार कर लें। इस काढ़े को छानकर 3 चम्मच रोजाना सोते समय देने से पेट के कीडे़ नष्ट हो जाते हैं।

Sunday, 1 February 2015

बालों के रोग

बालों के रोग
1. चमेली के तेल को सिर में लगाने से सिर-दर्द ठीक हो जाता हैं।

2. चमेली के पत्ते, कनेर, चीता तथा करंज को पानी के साथ लेकर पीस लें, फिर इनकी लुगदी के वजन से 4 गुना मीठा तेल और तेल के वजन से 4 गुना पानी और बकरी का दूध लें, इन सबको मिलाकर पका लें। जब थोड़ा तेल ही बाकी रह जाये तब इसे उतारकर छान लें। इस तेल को रोजाना सिर पर लगाने से गंजेपन का रोग मिट जाता है।

मधुमेह

1. रात को 50 ग्राम काले चने दूध में भिगो देते हैं और सुबह के समय खाते हैं। चने और जौ को बराबर मात्रा में मिलाकर इसके आटे की रोटी पहले सुबह-शाम खाने से लाभ मिलता है। 2. केवल बेसन (चने का) की रोटी ही 10 दिन तक लगातार खाते रहने से पेशाब में शक्कर का आना बंद हो जाता है।